कवि के आँसूओं को कागज़ ही सोखता है।।

अगर वजह ना पूछो तो एक बात कहूं ,बिन तेरे अब हमसे जिया नहीं जाता !!

मैं आज भी अपनी कमाई माँ के हाथ में देता हूँ उस सेख़र्चा लेने से घर में बरकत रहती है!🌹

यह जिस्म होता हैतो सब कुछ ख़त्म हो जाता हैपर चेतना के धागेकायनाती कणों के होते हैंमैं उन कणों को चुनूँगीधागों को लपेटूँगीऔर तुम्हें मैं फिर मिलूँगी… ~ अमृता प्रीतम

“संसार में हर इंसान का परिवर्तन निश्चित है,किसी का हृदय परिवर्तित होगा और किसी का समय..!!

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