दूसरों की आंखों में आंसू लाने वाले ये क्यों भूल जाते हैंकि भगवान ने दो आंखें उन्हें भी दी हैं और कर्म समय चक्र के साथ घूमकर एक दिन हमारे समक्ष अवश्य आते हैं।
कोई सवाल ज़िंदगी का हल नहीं हुआ,पढ़ने में सारी उम्र गवांने के बावजूद - अंकित मौर्य
कभी कभी अंदर की घुटन से दिल और दिमाग इस हद तकतकलीफ में आ जाते है की रोने से भी सुकून नही मिलता ...
यादों के सिलसिलेकभी छूटे ही नहींभूल तो गए हम सबपर तुम्हें भूले ही नहीं…
लहू किस कद्र लबों से फूटा हैसाँस टूटी है कि तेरा साथ छूटा है
शिकवा नहीं बनता अब रहजनों सेरहबरों ने ही काफिला लूटा है
लोग ओर भी शामिल थें मेरी हयात मेंदिल मगर तेरी जुस्तजू में टूटा है
चिराग जल रहें हैं...