कोई कुछ भी कहे मगर , देखो चीखे मज़लूमो की दबाना है !

गीत ग़ज़लों में शामिल गर हो ना सके, तो तुम्हारे दर्द में बसर हम ज़रूर करेंगे।

प्रेम सरल है.. जटिल उसे अपेक्षाएं बना देती हैं..!!

प्रेम पत्थर बनी देह को भी सुगन्धित कर दे...!!

किसी पीर से पूछो ना किसी फ़क़ीर से पूछो, तुम अपने बारे में सिर्फ अपने ज़मीर से पूछो....!!

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