हर एक हर्फ का अन्दाज बदल रक्खा हैआज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रक्खा हैमैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दियामेरे कमरे में भी एक ताजमहल रक्खा है।

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पे वार करोमल्लाहों का चक्कर छोड़ो,तैर के दरिया पार करोफूलों की दुकानें खोलो,ख़ुशबू का व्यापार करोइश्क़ ख़ता है तो ये ख़ताएक बार नहीं सौ बार करो।

एक ही नदी के है यह दो किनारे दोस्तोदोस्ताना ज़िन्दगी से, मौत से यारी रखो।

आँखों में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखोजिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो।

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हमआँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

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