सबूत तो गुनाहो के होते है !बेगुनाह मोहब्बत का क्या सबूत

सर कुचलने का भी हुनर रखती हूँ; नगिन के डर से जंगल नही छोड़ा करती मैं !!

सारा झगड़ा ही खवाहिशो का है ,ना गम चाहिए ना कम चाहिए ।।

जागना भी कबूल है तेरी यादों में रात भर तेरे एहसासों में जो मजा है वो नींद में कहा!!

कभी न कभी ज़िन्दगी मेकिसी कवि से प्रेम जरूर करना वो शायदनहाता कम होगापर दिन मे दो बारवो खुद को खंगलता जरूर होगाअपने अंदर के खयालो कोसड़ने से काफी पहलेकागजो पर निकालता जरूर होगा इसलिएएक बार को हीऐसे किसी शख्स के करीब...

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