न दिन होता है अब न रात होती हैसभी कुछ रुक गया हैवो क्या मौसम का झौंका थाजो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीरतिरछी कर गया है….
हमने सोचा था की जन्नत में हुरे मिलेंगीतो दिल नहीं लगाया किसी से..!!
तुझे जो #हिजाब में देखा तो,, लगा ऐसे ये दुनियां ही जन्नत है.!
बसीर बद्र
कितने हसीन नाज़नीन मिले तुम नहीं मिलेकुछ आप जैसे भी मिले पर तुम नहीं मिलेबारिश फिज़ा तुम्हारी पसंदीदा चाय भीमिलने के आसार तो लगे फिर भी तुम न मिले..
कभी गोधूलि बेला मेंघंटा ध्वनि से तुम आ जाओ….🌿
अगर कभी वक़्त में उनसे मुलाक़ात होगीसिर्फ़ रस्म निभाने की शायद वो क़वायद होगीहँसी आती है मुझको अब दरमियाँ आयेवजहों पर ,के अब एक अजनबी बन कर पहचान होगी…