यूॅं बार-बार मुझसे पूछकर मेरा इश्क़-ए-बयां , तुम "सज़दों" को शब्दों में तौला न करो..!!

मर्दों ने युद्ध जीते, धरती जीती, समुद्र जीता, आसमान जीता... औरतों ने मेकअप किया और मर्द को ही जीत लिया...

वाणी की मिठास अन्दर के भेद नहीं खोलती, मोर को सुन कर कौन कह सकता है कि वह साँप खाता होगा। अज्ञात

मैं छिपाना जानता तोजग मुझे साधु समझताशत्रु मेरा बन गया हैछल रहित व्यवहार मेरा।। हरिवंशराय बच्चन

मैं उठता हूं कभी कलम रखता हूंइस तरह इश्क के जज्बातों पर सर रखता होगा खेल कोई इश्क तुम्हारे लिए यारोंमैं तो मरे जिस्मों में मोहब्बत की रूह रखता हूं

Translate »