एक समंदर मेरे अंदर मस्त कलंदर... उछल रहा है उछल उछल कर निगल रहा है वक्त को वक्त की बेवजह पाबंदीओं को… अंदर के समंदर से कभी वक्त कहां बड़ा हो पाया ❓ मैंने मुझको हमेशा वक्त से बड़ा पाया इस लिए अंदर के समंदर में वक्त को डूबता पाया।।

खुश क़िस्मत तो हूं लेकिन , खुशियां मेरा नसीब नहीं हैं ..!!

गुरुर है मुझे अपने भी किरदार पर , कोई तुमसा नहीं तो कोई मुझसा भी कहाॅ॓ है ..!!

Auto Draft

बात करो रुठे यारों से, सन्नाटे से डर जाते हैं, प्यार अकेला जी सकता है, दोस्त अकेले मर जाते हैं

होंगे तुम्हारे शहर में तुम्हारी खूबसूरती के चर्चे , हमारे गांव में तो हमारी सादगी मशहूर है...

Translate »