दिन पे दिन बढ़ रही है तेरी बेरुखी ... किसी और से दिल लगा तो न लिया !

खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है। जीवन नाम है सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का। मुंशी प्रेमचंद

मेरी साँसों पर मेघ उतरने लगे हैं, आकाश पलकों पर झुक आया है, क्षितिज मेरी भुजाओं से टकराता है, आज रात वर्षा होगी। कहाँ हो तुम ?

ये लड़कियाँ भी ग़ज़ब ढाती है, मुझसे एकेले में मिलने बग़ैर दुप्पते के आती

पैसा हैसियत बदल सकता है, औकात नहीं....

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