कि इस दिल पर किसी चोट का असर नहीं होता, दर्द इतना सह लिया हैं कि अब दर्द नहीं होता ...

वह नास्तिक है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता। स्वामी विवेकानंद

मैं बागी रहूंगा हमेशा उन महफ़िलों का। जहां शौहरत तलवे चाटने से मिलती हो।।

नदियों का बहना और समंदर के खारेपन में समाहित हो जाना; प्रेम का इतना सा ही भाव है, प्रेम प्रारंभ भी अंत भी और अनन्त भी है। नेहा यादव

इक लंबे सफर से लौटकर सबकी खुद से मिलने की आस है झूठ बोलते हैं सब....... जो कहते हैं 'हम हमारे पास हैं '...!!

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