बरसी हैं घटाएं आज फिर अंगड़ाइयां लेकर ,
नया सावन तो आया है मगर तन्हाईयां लेकर ..!!
दुनिया जिसे कहते हैं जादू
का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए
तो सोना है।
निदा फ़ाज़ली
उसने हमसे रुसवा होकर..
हमारी जिंदगी का तमाशा बना दिया..!!
हज़ारो ठोकरें खाकर भी नाबाद बैठी हूँ
मैं जहाँ कल थी, वही पर आज बैठी हूँ
अँधेरों से नहीं शिकवा, नहीं क़िस्मत से नाराजगी कोई
किस्मत को भी सँभाल लूँगी मैं, अब ये ठान बैठी हूँ
छोड़ा हैं कई गैरो ने,...
तीर.. खंज़र... चाकू.. आपस में लड रहे थे कि कौन सबसे ज्यादा घाव देता है...
शब्द पीछे बैठे मुस्कुरा रहे थे...