जैसे जैसे दुनिया समझ आने लगती है, “विश्वास” शब्द खोखला लगने लगता है

मेरी हर गुफ्तगू जमीन से रही, यूँ तो फुर्सत में आसमान भी था...

यूँ भी हयात में है, जवानी की अहमियत जैसे शदीद प्यास में पानी की अहमियत रफ़्तार में रहें न रहें और बात है लेकिन है ज़िंदगी में रवानी की अहमियत लोगों ने सिर्फ़ सुन के, बजा दी हैं तालियाँ किरदार को पता है कहानी...

लोग अपनी परेशानियों से नहीं, दूसरों की खुशियों से परेशान होते हैं....

खिलाफ कितने हैं क्या फर्क पड़ता है साथ जिनका है वो लाजवाब हैं

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