उम्र कुछ नही कहती.. कारनामे हैसियत बता देते है..!!

अच्छे संस्कार किसी मॉल या बाजार में नहीं, परिवार के माहौल से मिलते हैं...

अगर मतलबी लोगों को खो देना एक हार है, तो ऐसी हार हमें स्वीकार है

क्यों है तेरा इन्तेजार ? किस बात कि है दरकरार ,, ? जानता हूँ कितनी ही सदायें दूँ तू ना आएगा पलटकर फिर भी क्यों है जिया बेकरार व्यर्थ है आशु अब पिया मिलन की आस,,,,, आशु

रोज़ी-रोटी, हक की बातें जो भी मुँह पर लाएगा, कोई भी हो, निश्चय ही वह कम्युनिस्ट कहलाएगा !

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