लबों पर मुस्कान लेकर आंखों से इशारा करती हो,
मुझ पर ही इतनी इनायत है या दुनिया को मारा करती हो..!!
विरक्ति
"समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो
शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो
पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोड़ेंगे
समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे
समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर
खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता...
हम भी सीखेंग अदा अब तो रूठ जाने की,उनको आदत है बहुत हमको भूल जाने की,लो हो गयी न तसल्ली जो दिल ये टूटा है,क्या ज़ुरुरत थी मुहब्बत को आज़माने की
भूमि और भाग्य का
एक ही स्वभाव है..!
जो भी बोया है..
वो निकलना तय है..!!
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा।
तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा
मगर वो आँखें हमारी कहाँ से लाएगा।
तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा।
बशीर बद्र