दिल लगा कर ठुकराए हुए लोग हैं हम.. अफ़सोस कीजिए, किनारा कीजिए, सबक लीजिए..!!

मै सुकून लिखूं तुम गंगाघाट समझ लेना, में इश्क़ लिखु तुम चाय समझ लेना।

अरे झूठ ही सही लेकिन काश कभी, मैं तेरे ख्वाबों का वहम बन जाऊं, तू इज़हार तो कर अपनी मोहब्बत का, मैं तेरे मरीज-ए-इश्क का मरहम बन जाऊं..!! विरक्ति

नादान हो तुम तुम्हें अभी इल्म नहीं है ये ज़िन्दगी है मेरी जान कोई फिल्म नहीं है..!!

काश तूझे तस्वीरों में ही जी भर के दिख लूं यार आज ये दिल मुस्कुराने की जिद में है....!!!!

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