जब जब लोगपरेशान हो जाते हैं..काफ़ी हद तक वोइंसान हो जाते हैं...

जिंदगी ने यूँ उधेड़ा बुन न पाये,चाह थी क्या, क्या मिला हम चुन न पाये.

"रास्ते" पर "गति" की सीमा है,"बैंक" में "पैसों" की सीमा है,"परीक्षा" में "समय" की सीमा है,परन्तुहमारे "सोच" की कोई सीमा नहीं,इसलिए "सदा" "श्रेष्ठ" "सोचें" और "श्रेष्ठ" पाएं..

यादों से न पूछें तरबियत उनकीये वो आजाद परिंदे हैं जो पल में सागर पार कर लेते हैं

जान जाने के बाद शरीर श्मशान में जलता हैतेरे जानेके बाद तो में बिन अग्निको जलता हु

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