तभी तक पूछे जाओगे जब तक काम आओगे चिरागों को जलते ही बुझा दी जाती है तीलियां .!!

कैसे थे और कैसे हो गये हैं हम ? खुद को ढूँढते ढूँढते खुद में ही खो गये हैं हम .. ना जाने क्या लिखा हैं किस्मत की लकीरों में ? धड़कनों से जिंदा हैं पर दिल से सो गये हैं हम ..

सोच कैसी है ईमान कैसा है लफ्ज़ बता देते हैं इंसान कैसा है।।

रोशनी का एक कतरा भी, अंधेरे को अपने वजूद का अहसास करा देता है...

खयालों के रिश्तें क्या जानें रूह से जुड़े रिश्ते क्या होते हैं..!!

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