ज़िंदगी में कुछ कम रंग हों
यही बेहतर है
इतने सारे गिरगिट
झेले नहीं जाते
प्रेम आपको डांट कर सुला देता है,
हवस रात भर जगाए रखती है.
तभी तक पूछे जाओगे जब तक काम आओगे
चिरागों को जलते ही बुझा दी जाती है तीलियां .!!
कैसे थे और
कैसे हो गये हैं हम ?
खुद को ढूँढते ढूँढते
खुद में ही खो गये हैं हम ..
ना जाने क्या लिखा हैं
किस्मत की लकीरों में ?
धड़कनों से जिंदा हैं
पर दिल से सो गये हैं हम ..
सोच कैसी है ईमान कैसा है
लफ्ज़ बता देते हैं इंसान कैसा है।।