सजा जो भी चाहो ,आप मुकर्रर कर दो, जब खता ही नहीं कई तो मुआफी कैसी।

कुछ न था मेरे पास खोने को , तुम मिले हो तो डर गया हूँ मैं ।।

आग उगलते न्यूज चैनल्स, जहर बाँटते अख़बार, बहुत हुआ अब बंद करो, नफरत का कारोबार!

आइना जब भी उठाया करो, पहले देखो... फिर दिखाया करो।

काँटों से दिल लगाया है, लहूलुहान होने दो अभी ज़मीं कहा है बस, उसे आसमान होने दो

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