मेरा रूठना तेरा मनाना मुझे मेरा कहना तेरा सुनना मुझे मेरा समझाना तेरा समझना मुझे मेरा बेपरवाह होना और तेरा जिम्मेदार कहना मुझे हाए...वो भी क्या खुश़-फैमियां थी मेरी ।।

कुछ बादलों की सी है फितरत उनकी छाते है मेरी छत पर बरस कहीं और जाते है बांट कर वक्त अपना महफिल में गैरों की बहानों भरे कुछ पल हमको थमा देते है रहूं हर पल उनके साथ इस हसरत से वो दिल में मेरी तस्वीर बना कर रखते है जानते...

संभल कर चल नादान, ये इंसानों की बस्ती हैं ... ये रब को भी आजमा लेते हैं फिर तेरी क्या हस्ती हैं ...!!!

आप वो नहीं होते जो आप बतातें हैं आप वो होते हैं जो आप छुपाते हैं

गांव बदलकर शहर हो रहा हैं, और इंसान बदलकर जहर हो रहा हैं...

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