राम दवा हैं रोग नहीं हैं सुन लेना राम त्याग हैं भोग नहीं हैं सुन लेना हरिओम पंवार

जिंदगी एक दिन खत्म हो जाएगी, बस इसी बात की खुशी है मुझे....

मन करे कभी कुछ अच्छा करने का, तो हांथ किसी विधवा का थाम लेना, किसी बेसहारा अभागी स्त्री कि, मांग फिर से तुम संवार देना, और ये कैसा समाज है जो बेटे को, दूसरे विवाह के लिए हां कहता है, वहीं दिखाकर डर घर कि इज्ज़त,...

ये रविवार नही आसान कपड़ो का दरिया है धो धो कर सुखाना है.

चलते चलते राह में तुमसे अलग हो जाए हम कौन जाने कब तुम्हारी दुखती रग हो जाए हम वसीम बरेलवी

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