कचरा कहां तक टाला जाये, पॉलिथीन कहां पर डाला जाये, तू भी कीचड़ का चैंपियन है, तैर जहां तक नाला जाये।

जब तू मुस्कुराने की वजह बन सकता हैं, तो रोने की क्यों नहीं .. ??

कुछ सास ससुर भी अपनी बहुओं की, खिदमतगारी का उपहार अनमोल देते हैं, खुद कि बेटी चाहे जैसे रहे ससुराल में, मगर बहू गलत करे तो मां बहन तौल देते हैं..!! विरक्ति

घूम कर सारा जहां, मेने खो दिया अपने आप को!

बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है सफर जारी रखो, वक्त बदलने वाला है। यशवर्धन जैन

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