वक़्त बदल गया है अब बेटियाँ नहीं, बेरोजगार लड़के माँ-बाप के कंधों पर बोझ होते हैं। जैकी यादव

वो जो उतरा है नज़र से इस बार, हमने उसकी नज़रें भी उतारी थी कभी !

अंत में दुश्मनों के कहे शब्द नहीं, दोस्तों की चुप्पी याद रहती है। मार्टिन लूथर

मिट्टी के हम चराग़ हैं यूं मत बुझा हमें , नादान -- तेरे ताक की रौनक हमीं से है

किताबें इस लिए पढ़ो ताकि आप, लोगों से बहस नहीं तर्क कर सको...

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