मिट्टी के हम चराग़ हैं यूं मत बुझा हमें , नादान -- तेरे ताक की रौनक हमीं से है

किताबें इस लिए पढ़ो ताकि आप, लोगों से बहस नहीं तर्क कर सको...

कचरा कहां तक टाला जाये, पॉलिथीन कहां पर डाला जाये, तू भी कीचड़ का चैंपियन है, तैर जहां तक नाला जाये।

जब तू मुस्कुराने की वजह बन सकता हैं, तो रोने की क्यों नहीं .. ??

कुछ सास ससुर भी अपनी बहुओं की, खिदमतगारी का उपहार अनमोल देते हैं, खुद कि बेटी चाहे जैसे रहे ससुराल में, मगर बहू गलत करे तो मां बहन तौल देते हैं..!! विरक्ति

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