ज़िन्दगी के तजुर्बों में एक अनुभव ये भी सबसे काम का रहा,गोपनीयता को प्राथमिकता देने वाला हर इंसान नमक हराम रहा

मजबूरिया तुम पर आई और तन्हा हम हो गए

जिन साँपों को गुरूर है आपने जहर पर मैं उन्हें बता दू कि मैं इलाज जानता हूं।

हवाएँ ज़ोर कितना ही लगाएँ आँधियाँ बन कर मगर जो घिर के आता है वो बादल छा ही जाता है

अपनी कहानी का लेखक मैं खुद हूं , जब मन करेगा किरदार बदल दूंगा ।।

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