चश्मदीद अन्धा बना, बहरा सुने दलील
झूठों का है दबदबा, सच्चे हुये ज़लील
मत सोचो जिंदगी बोझ है...
खुश रहो क्योंकि समस्या तो रोज है..!!
इरादा है बदलने का तो कोशिश कर बदलने की
अगर सूरज नहीं है तो चराग़ों से उजाला कर
मिलेगी हार या फिर जीत का परचम उठाएगा
नतीजा जो रहे लेकिन नया सिक्का उछाला कर
राघवेंद्र द्विवेदी
न चाहते हुए भी किताबों से,
हमेशा दोस्ती रखनी पड़ेगी।
हम किताबी कीड़े है मेरी जान!,
हमसे मोहब्बत महंगी पड़ेगी।।
क्रोध सदैव दूसरे को कम
और
स्वयं को ज्यादा हानि पहुंचती है !!!