रूठी हुई ख़ामोशी से बोलती हुई शिकायतें अच्छी होती हैं

जिसकी मति और गति सत्य की हो,उसका रथ आज भी श्री कृष्ण चलाते हैं

सब नज़र का फेर है रावण की नज़र हो तो,राम भी गलत दिखेंगे.

एक छींक की तरहआ जाएगी मृत्युजेब में रूमाल तक नहीं होगा...

एक घुटन सी हो रही थी मुझे संपूर्ण रात्रि ,घबराहट सी हो रही थी अपने ही अंधेरे कमरे में....भोर की सुनहरी रौशनी आई एक हल्की दस्तक लिए ,उदासी तमाम मेरे कमरे के दरवाज़े से फ़ौरन ही विदा हो कर नई...

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