इतने सिद्दत से मेहनत करो तुम..कि तुमको कतरा नहीं तुमको समंदर मिले..

परिवार, हालात और रिश्ते जो संभालना चाहता है,वही झुक जाता है,वर्ना स्वाभिमान तो सुदामा का भी कहाँ कम था।

ता उम्र के लिएं हाथ थामना होता है,ए पल दो पल का खेल नहीं होता...

खुद मे झाकने के लिए ज़िगरा चाहिए,,,दुसरो की शीनाखत् मे हर शख्स माहिर है,,,

अपनी ज़िंदगी में खुद रोशनियां पैदा करो,यकीनजानो तुम्हारे अलावा तुम्हारा कोई भी वफादार नही है ...

Translate »