तन्हा जीवन, उदास हम, किस्मत पर कांटे उग आएं हैं,
क्या सुनाएं दास्तान अपनी, अंदर कितने राज़ छिपाएं हैं..!!
सुनो साहिब,
तुम्हारे प्रेम के रंगों से
रंगीन हुआ मेरा बेरंग
उदास सूना जीवन।
जी नहीं सकती अब
कभी भी तुमसे दूर रह
मर जाऊंगी तुम्हारे बिन।
ख्वाहिश नहीं मुझे
ज्यादा चीजों की
सिर्फ़ चूड़ियां कभी
अपनी पसंद की
पहना देना,
पायल तो नहीं
पहनूंगी तुमसे
कदमों में अपने कभी
तुम्हें नहीं झुकाना।
हमारी हकीकत हमे ही पता है,
लोगों ने इस चेहरे को बस हसते हुए देखा है...
शेर को पालने में उतना खर्चा नहीं है
जितना मेकअप और पब्लिसिटी
कर सियार को लगातार शेर के रूप में प्रस्तुत करने में है।
वो मस्जिद गया मन्दिर भी गया और गया समुद्र के बीच…..
लेकिन रहा फिर भी नीच का नीच