एक ही शख्स समझता था उसे, और एक ही शख्स समझता था मुझे !! फिर ये हुआ की वो भी समझदार हो गया, और हम उसके सामने बच्चे ही रह गये !!

अदाओं का खेल है बहुत सारा. कुछ लोग ज़िस्म पर भी मरते होंगे.!

जिददी हूँ, गुस्से वाला हूँ, बतमीज़ हूँ, बेपरवाह हूँ, लेकिन मैंने कभी किसी से रिश्ता मतलब के लिए नहीं रखा..!!

“एक दिन सब ठीक होगा ” बस इस उम्मीद के सहारे एक एक दिन बिताते जाना , ज़िंदगी है ..!!

कहते हैं आत्मा से ख़ून नहीं बहता शायद इसलिए, सबसे ज्यादा घाव आत्मा को सहने पड़ते हैं !

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