ये लफ्ज़ों के वादे ये किताबी मोहब्बत .. है आज के दौर में बड़ी खराबी मोहब्बत ... !!

अपनी आग को ज़िंदा रखना कितना मुश्किल है, पत्थर बीच आईना रखना कितना मुश्किल है...

वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैंl

टूटकर भी जो मुस्कुरा दे, उसे कोई कैसे हरा दे…

जिंदा इंसान को गिराने मे औरमरे हुए इंसान को उठाने मे,ग़ज़ब की एकता दिखाते हैं लोग…

Translate »