मैं कोई रिश्ता नहीं हूं जो तुम निभाओगे मुझे , मैं मोहब्बत हूं बस मोहब्बत से ही पाओगे मुझे ..!!

तुम्हारी आँखों ने बसाएं रखा है शहर कोई,कोई तन्हा हो सकता है, कानपुर से खफ़ा नहीं,

मनुष्य कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए।

मैंने अपनी पीड़ा किसी को नहीं बताई, क्योंकि मेरा मानना है कि व्यक्ति में इतनी ताकत हमेशा होनी चाहिए कि अपने दुख, अपने संघर्षों से अकेले जूझ सके

अगर आज भी लगता हैं आपको की गलती मेरी थी,तोमैं माफ़ी मांगने के लिए तैयार हू,बस आपको साबित करना हैं।

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