कोई ऐसी कला, कोई विधा, कोई शब्द, कोई गुण कोई आचरण बना ही नही जिससे कोई भी अनमना न हो, जिससे किसी को भी शिकायत न हो.

"बहुत कुछ टूटता है तब नया बनता है।" ~ गिरिजा कुमार माथुर

सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना,पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है.!

इंसान की कदर तब होती है जबउसके कारनामे लोगों के काम आते हैं..!!

मेरे लिखे शब्दो का हूबहू अर्थ हो तुम,खुद को तेरा न कहुँ तो मुझ बिन व्यर्थ हो तुम।

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