वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगेतुम्हें याद है कुछ ये शब्द किस के थे.!

ज़िंदगी जब मायूस होती है,तभी महसूस होती है….

देख लिया तेरी इमानदारी ऐ दिल तूं मेरा है और तुझे फ़िक्र किसी और कि

शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैंकि सब कुछ शुरू से शुरू होलेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैंहमें कोई दिलचस्पी नहीं रहतीकि वह सब कैसे समाप्त होता हैजो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ थाहमारे चाहने पर। ~ कुँवर नारायण

कोई तो बहाना बनाओइक मुलाकात का_!!

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