जख्म तो कोई भी दे सकता है,हिम्मत है तो किसी का हमदर्द बन कर देखो.

अब जो है, कुछ भी नहीं है हमारातेरा ख़्वाब आख़िरी था इन आँखों में_!!

उसके घरवालों को कैसे समझाऊंजब वो फोन पर रोती है तो मेरा खून खौलता है..

मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!

'आज का प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति प्रेम का भूखा है।' ~ मुक्तिबोध

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