स्त्री का सम्मान ही पुरुष की मर्दानगी हैं,और पुरुष के सम्मान में ही स्त्री की सुंदरता हैं…

ए इश्क़ मुझे अब और जख्म चाहिए, मेरी शायरी में अब वो बात नही….!!

ये संवाली रंगत सादा हुलिया उदास आंखें हम से जो कोई दिल लगाए तो क्यों लगाए!!

डूबी है मेरी उंगलियां मेरे ही खून मैं,ये काँच के टुकड़ो पर भरोसे की सजा है !!

आज फिर लौट आया बिना मांगें ,मैं तेरे दर से…!.तुझे बस देख लेता हूँ तो ख्वाहिशें ,खत्म हो जातीं हैं…!!

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