पिता का मौन यदि सुन सको तो, दुनिया के ताने सुनने की नौबत नहीं आएगी। प्रह्लाद पाठक

आ गए ना तुम अपनी औकात पर.. मेरा मतलब है मतलब की बात पर..!!

सफल होने के लिए तुम्हें, खुद की दुनिया में कैद होना पड़ेगा...

हिम्मतें जब एक जुट हो जाती हैं... तभी मुसीबतें अकेली पड़ जाती हैं..!!

मौन और एकांत आत्मा के, सर्वेत्तम मित्र हैं....

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