इन बारिशों से कह दो कहीं और जाकर बरसे ..... मुरशद ... इतनी रिमझिम तो रोज हमारी आँखों में होती है।।

तब और खिल उठेगा रंग उसकी मेहंदी का,जब मिश्रित उसमें मेरे प्रेम का रस होगा..!!

खामोशी जुर्म है इस दौर में बोलना सीखो.. वरना मिट जाओगे हालातों के तूफानों में..!!

अफ़सोस हो रहा है तेरा हाल देखकर , तुझको भी मेरे बाद मोहब्बत नहीं मिली ।।

बुद्धिमत्ता की पुस्तक में.. ईमानदारी पहला अध्याय होता है..!!

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