मुकम्मल नहीं हुआ "इश़्क़", इसलिए आज "शायर" बना बैठा हूं, अपने कल के "हालातों" से हार कर, मैं आज "कायर" बना बैठा हूं, और हर "कसौटी" पर खरी उतरी वो, तो "मोहब्बत" को क्या दोष देते, मैं खुद "मुकद्दर" से चोट खा कर, आज यहां "अधमरा" बैठा...

महंगे तुझे क्यों लग रहे हैं ए ज़िंदगी, खर्चा सिर्फ सासों का ही है हमारा....

फिर एक दिन वो लोग भी सो जाते हैं, जिनको रातों में नींद नहीं आती....

एक पीढ़ी का पाखण्ड अगली पीढ़ी की परम्परा बन जाती है। हेलेन केलर

अगर दिशा दिखाने वाला सही हो तो, दीपक का प्रकाश भी सूर्य का कार्य करता है...

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