विश्वास का पौधा लगाने से पहले जमीन को
परख लेना क्यों कि हर मिट्टी वफादार नहीं होती..
ज़िंदगी से बढ़कर था भूख का मसअला ,
परिन्दा जाल पे यूँ ही नहीं उतर आया ..!!
सूरत देखकर नहीं सीरत देखकर हमसफर ढूंढना ,
क्योंकि बुढ़ापे में अच्छे चेहरे नहीं सहारे काम आते हैं...!!
मुकम्मल नहीं हुआ "इश़्क़",
इसलिए आज "शायर" बना बैठा हूं,
अपने कल के "हालातों" से हार कर,
मैं आज "कायर" बना बैठा हूं,
और हर "कसौटी" पर खरी उतरी वो,
तो "मोहब्बत" को क्या दोष देते,
मैं खुद "मुकद्दर" से चोट खा कर,
आज यहां "अधमरा" बैठा...
महंगे तुझे क्यों लग रहे हैं ए ज़िंदगी,
खर्चा सिर्फ सासों का ही है हमारा....