मोमबत्ती को आखिर में ही पता चलता है कि
उसे उस धागे ने ही खत्म किया,
जिसको वो सीने में छुपाए रखती थी...
ज़्यादा प्रशंसा करने वालों से खुश नहीं ,
सावधान रहने की ज़रूरत है ...
दर्पण देख सँवर गए कितने
अपने पर ही मर गए कितने
ख़्वाबों की खेती को सच के
कीट-पतंगे चर गए कितने
प्यार वफ़ा ईमान की बातें
करके लोग मुकर गए कितने
फ़ाइलें सब्ज़ योजनाओं की
चूहे रोज़ कुतर गए कितने...
किसी से क्या शिकायत करते साहब ,
दिल लगाने की खता तो हमनें भी की..!!
वक्त निकल जाने के बाद जो कद्र होती है,
वो कद्र नहीं अफसोस होता है...