ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है। स्वामी विवेकानंद

घाट का एक पत्थर हूं मैं मैंने नदी के हजार रूप देखे हैं!

टूटते हुए रिश्तों को बचाइए, बिना बुलाए अपनों के घर जाइए, फल-मिठाई ना सही, कम से कम टमाटर ही ले जाइए।

मोमबत्ती को आखिर में ही पता चलता है कि उसे उस धागे ने ही खत्म किया, जिसको वो सीने में छुपाए रखती थी...

ज़्यादा प्रशंसा करने वालों से खुश नहीं , सावधान रहने की ज़रूरत है ...

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