इक्का चाहे कितना भी उछलें.. हुकुमत तो बादशाह ही करता है..!!

ये जादू तेरे इश्क का, या मुझे नशा हो गया है, तेरे सिवा हर शख्स क्यू धुंधला सा हो गया है...!!!

पुरुष पेड़ पे लगे उन पत्तो कि तरह होते है, जिन्हे धूप तो मिलती है पर छाँव नहीं..

फिक्र है तो लड़ना जरूरी है वरना खामोशी रिश्ते तोड़ देती है !!

अपने हिस्से की क़िस्मत अपने हाथों से ही गढ़ लेंगे ,धीरे-धीरे ही सही मगर थोड़ा बहुत हम भी पढ़ लेंगे ।।

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