राजनीतिक भाषा की रचना ऐसी हैं जिसमे झूठ को सच बताया जाता हैं, और सच का बड़े सम्मान के साथ हत्या किया जाता हैं

आँखों में नींद आए भी तो कैसे आएगी कुछ ख़्वाब कह रहे हैं अभी जागते रहो राघवेंद्र द्विवेदी

नेक बनने की कोशिश करो, जैसे खूबसूरत बनने की करते हो...

वफ़ा चाहिए तो एक कुत्ता पाल लो, इंसानों के फितरत में वफ़ा नही रहा , ये मान लो ।।

इंसान तो हर घर में पैदा होते हैं, बस इंसानियत कहीं कहीं जन्म लेती है....

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