मुक़द्दर की लिखावट का एक ऐसा भी काएदा हो.... देर से किस्मत खुलने वालों का दुगुना फायेदा हो...!!!

छल के युग में सच बोलना एक क्रांतिकारी कार्य है.! जॉर्ज आॉरवेल

ज़िन्दगी का मामला भी अजीब है साहब.. ठोकर देकर संभालना सिखाती है..!!

कीमत दोनों को चुकानी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी....

जब नादान थे तो जिंदगी के मजे लेते थे, समझदार हुये तो जिंदगी मजे ले रही है ..!!

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