मुसीबत के वक्त ही परखे जातें हैं रिश्ते, वर्ना बातें तो सब वफादारी की ही करते हैं...!!

आज मैं उधर से निकला था जहाँ हम मिलते थे, किसी ने वहाँ दीवार खड़ी कर दी.

छत पर वॉक करने वाला मौसम है, और छत से छलांग लगाने वाले हालात.

हवस की भूख एक ऐसी भूख है जो पेट भरने, और दिमाग़ ख़ाली होने के बाद लगती है..!! अनवर चतुर्वेदी

रिश्ता कैसा यह जानने से अच्छा है, अपनापन कितना है ये महसूस किया जाए....

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