वक़्त अपने उसूलों पे है हमेशा से कायम इम्तिहान जिसका भी लेता है रियायत नहीं

कमियाँ हैं तो रहने दो साहब खुद को खुदा थोड़ी बनाना है..

वो जो हर दर्द अपने दिल में छुपाए बैठा है रो पड़ेगा कभी लगना आहिस्ता गले उसके

हर आदम की अपनी-अपनी किस्मत है। हर किस्मत का अपना - अपना रोना है।।

बिसाते-जिंदगी पर हसरतों के प्यादे हैं, मुकम्मल लोग भी कितने अधूरे-आधे हैं...

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