जिंदगी जला ली हमने जैसी जलानी थी, शाहब अब धुएं पे तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी..!

बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है , पर यह पशु की तौहीन है, पशु बलात्कार नहीं करते। सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है। हरिशंकर परसाई

अगर अंधे आदमी को आंख मिल जाए तो वो सबसे पहले छड़ी फेंकता है जिसने बुरे वक्त में उसका साथ दिया ...

कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते

तिरी ज़मीं से उठेंगे तो आसमाँ होंगे हम ऐसे लोग ज़माने में फिर कहाँ होंगे इब्राहीम अश्क

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