मुकेश को याद करते हुए...१०० साल {1923-2023}

नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को। किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।। सेजल

पन्नों के परे भी है एक ज़िंदगी सभी किरदार किताबों में नहीं होते

झूठे वादों से बेहतर है... साफ इंकार कर दिया जाए..!!

कुछ लोग आपसे सीखकर, आपको ही सिखाने लगते हैं....

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