इल्तिजा करते हुए प्यासा परिंदा मर गया अब तो दरिया को हया से डूब मरना चाहिए राघवेंद्र द्विवेदी

विरह कि आग में जल रही, अपनी ज़िन्दगी को खींच रहा हूं, बंद हो चुकी अपनी प्रेमग्रंथ के, जज्बातों को सींच रहा हूं..!! विरक्ति

जितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगा गोपाल दास ‘नीरज’

उम्मीद ना कर किसी से इस दुनिया में हमदर्दी की... बड़े प्यार से जख्म देते है शिद्दत से चाहने वाले...!!

झूठी हैं इश्क़ की किताबें और शायर सभी , किसी ने रोते हुए लड़को के बारे मे नहीं लिखा ।।

Translate »