ज़िन्दगी के "पन्नों" में मेरा किरदार भी "जोकर" का रहा, मैं "हंसा" तो भी लोग हंसे मैं "रोया" तब भी लोग हंसें..!!

गलतफहमियां तो होंगी रिश्ते में, तुम संभाल लोगे ना.. यूं तो वक्त मिलेगा नहीं कभी, पर तुम निकाल लोगे ना..!!

अच्छा बताओ-? चूल्हे पर बनी रोटी...खाए हो कभी-?

वो जो है ही नहीं हक़ीक़त में उससे कैसे कहें के घर आए आसमां पे उसे निहारेंगे जिसको मिट्टी में दफन कर आए

शब्द पढ़ने वाले लिखें जज़्बात नहीं पढ़ पाते..!!

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